梵文大悲咒

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長久以來,大悲咒的文字所代表的意思一直不明白,在偶然找到「本來無一物」這個網站後,猶像發現了寶藏,裡面就有梵文大悲咒的翻譯!

青頸觀音陀羅尼(漢傳大悲咒)-全文字各版本咒語對照2020.02.18更新|本來無一物
青頸觀音陀羅尼(漢傳大悲咒)的天城梵文、梵音、經書漢音、中文大概解釋,全文字對照版。

再深入逐句學習的過程,又發現外國學者「Lokesh Chandra」著作「The Thousand Armed Avalokiteśvara」,裡面就在專講「梵文還原的大悲咒」。

共有六種版本,其中以我個人理解,與漢傳大悲咒最接近的,就是下列來自金剛智大師的翻譯版本。以下,就是梵文大悲咒(由書本掃描後OCR轉換)

2. LONGER VERSION

(Vajrabodhi, T 1061)

१. नमो रत्न-त्रयाय। नम आर्यावलोकितेश्वराय बोधिसत्त्वाय महासत्त्वाय महाकारुणिकाय सर्व-बन्धन-च्छेदन-कराय सर्व-भव-समुद्र-शोषण-कराय सर्व-व्याधि-प्रशमन-कराय सर्वेत्युपद्रव-विनाशन-कराय सर्व-भयेषु त्राण-कराय। तस्मै नमस्कृत्वा इमं आर्यावलोकितेश्वर-भाषितं नीलकण्ठ-नाम।

२. हृदयं वर्तयिष्यामि सर्वार्थ-साधकं शुभम्।

अजेयं सर्व-भूतानां भव-मार्ग-विशोधकम्।।

३. तद्यथा। ॐ आलोक ए आलोक-मति लोकातिक्रान्त एहि हरे आर्यावलोकितेश्वर महाबोधिसत्त्व। हे बोधिसत्त्व हे महाबोधिसत्त्व हे वीर्य-बोधिसत्त्व हे महाकारुणिक स्मर हृदयम्। एह्येहि हरे आर्यावलोकितेश्वर महेश्वर परमार्थ-चित्त महाकारुणिक। कुरु-कुरु कर्म। साधय-साधय विद्याम्। देहि-देहि त्वं कामं गम विहंगम विगम सिद्ध-योगेश्वर। धुरु-धुरु वियन्त ए महावियन्त ए। धर-धर धरेन्द्रेश्वर। चल-चल विमलामल आर्यावलोकितेश्वर जिन। कृष्ण-जटा-मकुटा ऽवरम प्ररम विरम महासिद्ध-विद्याधर। बल-बल महाबल मल्ल-मल्ल महामल्ल चल-चल महाचल। कृष्ण-वर्ण दीर्घ-कृष्ण-पक्ष-निर्घातन हे पद्म-हस्त। चर-चर निशाचरेश्वर कृष्ण-सर्प-कृत-यज्ञोपवीत। एह्येहि महावराह-मुख त्रिपुर-दहनेश्वर नारायण-बलोपबल-वेश-धर। हे नीलकण्ठ हे महाकाल हलाहल-विष-निर्जित लोकस्य राग-विष-विनाशन द्वेष-विष-विनाशन मोह-विष-विनाशन हुलु-हुलु मल्ल। हुलु हरे महापद्मनाभ। सर-सर सिरि-सिरि सुरु-सुरु मुरु-मुरु। बुध्य-बुध्य बोधय-बोधय मैत्रिय नीलकण्ठ। एह्येहि वाम-स्थित-सिंह-मुख। हस-हस मुञ्च-मुञ्च महाट्टहासम्। एह्येहि भो महासिद्ध-योगेश्वर। भण-भण वाचम्। साधय-साधय विद्याम्। स्मर-स्मर तं भगवन्तं लोकित-विलोकितं लोकेश्वरं तथागतम्। ददाहि मे दर्शन-कामस्य दर्शनम्। प्रह्लादय मनः स्वाहा।

सिद्धाय स्वाहा। महासिद्धाय स्वाहा। सिद्ध-योगेश्वराय स्वाहा। नीलकण्ठाय स्वाहा। वराह-मुखाय स्वाहा। महानरसिंह-मुखाय स्वाहा। सिद्ध-विद्याधराय स्वाहा। पद्म-हस्ताय स्वाहा। कृष्ण-सर्प-कृत-यज्ञोपवीताय स्वाहा। महालकुट-धराय स्वाहा। चक्रायुधाय स्वाहा। शंख-शब्द-निबोधनाय स्वाहा। वाम-स्कन्ध-देश-स्थित-कृष्णाजिनाय स्वाहा। व्याघ्र-चर्म-निवसनाय स्वाहा। लोकेश्वराय स्वाहा। सर्व-सिद्धेश्वराय स्वाहा।

४. नमो भगवते आर्यावलोकितेश्वराय बोधिसत्त्वाय महासत्त्वाय महाकारुणिकाय। सिध्यन्तु मे मन्त्र-पदानि स्वाहा।।


作者對此咒的介紹,參考下列兩頁:


包括其他版本的掃描圖片,也一併列於此,給大家參考:


為了讀到這本書,還特地至金山法鼓山圖書館,借這本書來看~感謝諸佛菩薩護法龍天護持~一切順利~

參考資料: